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Saturday, 4 June 2016

शनि धाम के दर्शन मात्र से होती है दरिद्रता दूर....


समस्तह संसार शनि देव की महिमा से परिचित है। शनि देव की कृपा से मनुष्य। पल में रंक से राजा बन जाता है तो वहीं इनका प्रकोप होने पर राजा के रंक बनने में देर नहीं लगती। शनिदेव को नाराज़ करने की हिम्मलत किसी में भी नहीं है। इनके नाम से ही लोग कांपने लगते हैं। शनि देव के प्रकोप को तो सभी जानते हैं इसलिए इनको शांत रखने के लिए मनुष्यस हरसंभव प्रयास करते हैं।
मंदिर में रोजाना लगभग 50,000 आगंतुक दर्शन करने आते हैं, लेकिन इनकी संख्या अमावस्या के दिन तीन लाख से अधिक यानी छह गुना तक बढ़ जाती है। शनिदेव को खुश करने के लिए अमावस्या का दिन सबसे शुभ माना जा रहा है।
शनिवार के दिन आने वाली अमावस्या को लोग शनि देव की पूजा, अभिषेक और झांकी आदि निकालते हैं। नवग्रहों में शनि को सर्वश्रेष्ठ ग्रह माना जाता है क्योंकि शनि एक राशि पर ज्यादा समय तक विराजमान रहते हैं। शनिदेव की महिमा अपरम्पाशर है।