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Saturday, 15 October 2016

आपकी दीवाली की खुशियों को दोगुना कर देगा ये यंत्र, जानिए क्या खास है इस यंत्र में....


धनवर्षा यंत्र कोई साधारण यंत्र नहीं है। इसकी स्‍थापना से मां लक्ष्‍मी प्रसन्‍न होती हैं। यह यंत्र मां लक्ष्‍मी को प्रसन्‍न करने का प्रभावकारी माध्‍यम है। यह यंत्र गुप्‍त आराधना और तपस्‍या करने वाले साधकों द्वारा ही सिद्ध किया जाता है।

श्रीलक्ष्‍मी यंत्र

श्री लक्ष्‍मी यंत्र को स्‍थापति करते ही आपको इसके शुभ प्रभाव मिलने शुरु हो जाएंगें। इस यंत्र के प्रभाव से धन की वर्षा होने लगेगी और बिगड़ते काम भी बनते नज़र आएंगें।


मां लक्ष्‍मी की मूर्ति

धन वर्षा यंत्र की आधिपति मां लक्ष्‍मी हैं। इस यंत्र में मां लक्ष्‍मी की प्रतिमा है जिसे अपने घर अथवा दुकान में स्‍थापित करने से धन प्राप्‍त होता है, आय के स्रोत बढ़ते हैं और रुका हुआ धन भी प्राप्‍त होता है।

लक्ष्‍मी यंत्र कवच

इस यंत्र में दिए गए लक्ष्‍मी कवच को धारण करने से धन चुंबक की तरह खिंचा चला आता है। यह धन को आकर्षित करने का सबसे सरल माध्‍यम है। इस कवच को व्‍यापारी और नौकरीपेशा लोग धारण कर सकते हैं।


मेरु श्री यंत्र

इस मेरु श्री यंत्र की स्‍थापना से छ: दिशाओं से धन आपके पास आता है। जिस भी दिशा अथवा क्षेत्र में आप धन कमाने का प्रयास करते हैं उसमें आपको निश्‍चित ही सफलता मिलती है।

मां लक्ष्‍मी की चरण पादुका

धन की देवी मां लक्ष्‍मी की चरण पादुका को अत्‍यंत शुभ माना जाता है। पूजा स्‍थल अथवा तिजोरी में मां लक्ष्‍मी की चरण पादुका रखने से आपका धन सदा के लिए सुरक्षित रहता है और उस पर किसी की बुरी नज़र नहीं पड़ती है।

Saturday, 9 July 2016

घर में जरूर रखें ‘श्री यंत्र’, कभी नहीं रूठेगी लक्ष्मी


ज्‍योतिष शास्‍त्र में सुख-समृद्धि के कई उपाय बताए गए हैं किंतु श्री यंत्र एक ऐसा चमत्‍कारिक यंत्र है जो घर में सुख-समृद्धि के साथ-साथ खुशहाली भी लाता है। यह एक ऐसी विस्‍मयकारी खोज है जो मनुष्‍य को हर तरह से शांति प्रदान करता है।



ब्रह्मांड का प्रतीक

श्री यंत्र में बहुत शक्‍ति होती है एवं ब्रह्मांड का यह एकमात्र शक्‍तिशाली प्रतीक है। पूरा ब्रह्मांड इस एक श्रीयंत्र में समाया हुआ है। श्री यंत्रको देवी लक्ष्‍मी, मां सरस्‍वती, धन-धान्‍य और संपन्‍नता का प्रतीक कहा जाता है। नियमित रूप से श्री यंत्र की पूजा करने से घर में मां लक्ष्‍मी का निवास रहता है। इस पवित्र यंत्र की साधना से धर्म, मोक्ष, अर्थ, काम की प्राप्‍ति होती है। 


महत्‍व

श्री यंत्र को प्रकृतिमयी मां भगवती महात्रिपुर सुंदरी का पूज्‍य स्थल माना जाता है। यह एक ऐसा यंत्र है जिसकी आराधना तीनों लोकों के देवी-देवताओं की पूजा के समान है।
नौ चक्रों से निमिर्त इस यंत्र में पांच शक्ति चक्र और चार शिव चक्र होते हैं एवं इसमें 43 त्रिकोण, 28 मर्म स्थान, 24 संधियां बनती हैं।