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Tuesday, 8 November 2016

जानिए किस मंदिर में हुआ था शिव-पार्वती का विवाह..


रुद्रपयाग को देवभूमि भी कहा जाता है। मान्‍यता है कि इस स्‍थान पर भगवान शिव वास करते हैं। रुद्रप्रयाग में भगवान शिव के अनेक प्राचीन मंदिर हैं जिनका उल्‍लेख पुराणों में भी मिलता है। किवदंती है कि रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक गांव में भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था।

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रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण गांव में एक पवित्र अग्नि जल रही है जिसके बारे में मान्‍यता है कि इसी अग्‍नि के सामने शिव और पार्वती ने सात फेरे लिए थे। यह अग्नि तब से लगातार जल रही है और श्रद्धालु इसे निरंतर प्रज्वलित रखते हैं। 


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भगवान शिव को पाने के लिए मां पार्वती द्वारा इसी स्‍थान पर तपस्‍या भी गई थी। मां पार्वती की तपोभूमि भी यहीं स्थित है। इस स्‍थान को गौरी कुंड के नाम से जाना जाता है। हर साल अनेक श्रद्धालु यहां आकर इस पवित्र भूमि के दर्शन करते हैं।

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त्रियुगीनारायण गांव में तीन कुंड भी हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि इनका निर्माण ब्रह्मा, विष्णु और शिव के नाम पर किया गया था। विवाह की सभी रस्में निभाने से पहले त्रिदेवों ने यहां स्नान किया था।

Friday, 14 October 2016

गुजराज के इस मंदिर में होता है हर रोज़ चमत्का्र, जानिए क्या है इस मंदिर का रहस्य .....


गुजराज राज्‍य के वड़ोदरा शहर से 60 किमी की दूरी पर कवि कंबोई गांव में स्थित है भगवान शिव का स्‍तंभेश्‍वर मंदिर। यह मंदिर कई रहस्‍यों से भरा है। इसे गायब मंदिर भी कहा जाता है। स्‍तंभेश्‍वर मंदिर से चमत्‍कारों का गहरा संबंध है एवं इस मंदिर से एक अनोखी घटना जुड़ी हुई है। ये घटना साल में कई बार देखने का मिलती है। आइए जानते हैं इसके बारे में -:


खासियत -:

अरब सागर की खंभात खाड़ी में बना यह मंदिर अद्भुत है। समुद्र के बीचोंबीच होने की वजह से इसका सौंदर्य अद्वितीय है। इस मंदिर की अनोखी घटना समुद्र से ही जुड़ी है। इस मंदिर के दर्शन समुद्र की शांत लहरों में ही किए जा सकते हैं। आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि ऊंची लहरे होने पर स्‍तंभेश्‍वर मंदिर समुद्र में डूब जाता है। इसीलिए इसे गायब मंदिर कहा जाता है। जब समुद्र की लहरें शांत होती हैं तो मंदिर धीरे-धीरे दिखाई देने लगता है। इस मंदिर पर दिन में दो बार ज्‍वारभाटा आता है और मंदिर में स्‍थापित शिवलिंग का अभिषेक कर वापस लौट जाता है।

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ज्‍वार आने पर मंदिर पूरी तरह से जलमग्‍न हो जाता है। किवदंती है कि ये प्रक्रिया सदियों से चली आ रही है एवं इस नियम को कभी भी टूटते हुए नहीं देखा गया है। स्‍तंभेश्‍वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि और प्रत्‍येक अमावस्‍या को मेला लगता है। वहीं प्रदोष, पूनम और ग्‍यारस की पूरी रात को यहां चारों प्रहर पूजा की जाती है।

Tuesday, 2 August 2016

कुबेर का खजाना पाने के लिए सावन में करें ये उपाय

सावन माह में न केवल भगवान शिव को सरलता से प्रसन्‍न किया जा सकता है बल्कि उनके परम मित्र धन के देव कुबेर की भी विशेष कृपा पाने के लिए यह समय अति उत्‍त्‍म माना जाता है। जीवन में धन का क्‍या महत्‍व है ये तो हम सभी जानते हैं किंतु ज्‍योतिष शास्‍त्र के अनुसार हमारी आर्थिक स्थिति सौरमंडल के ग्रहों पर निर्भर करती है।

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यदि कुंडली के ग्रह खराब हुए तो व्‍यक्‍ति कर्ज में डूब जाता है और एक-एक पैसे को मोहताज हो जाता है। पूरे संसार के धन पर कुबेर का अधिकार है इसलिए यदि आप धनवान बनना चाहते हैं तो सावन में भगवान शिव के साथ-साथ कुबेर देव को भी प्रसन्‍न करें। जिसे कुबेर का आशीर्वाद मिल जाए उसे जीवन में कभी पैसे की कमी नहीं होती।

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- कुबेर को मंत्र जाप से प्रसन्‍न किया जा सकता है। इस मंत्र का जाप दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। बिल्‍वपत्र की जड़ों के निकट बैठकर इस मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ होता है।
मंत्र: ऊँ श्रीं, ऊँ ह्रीं श्रीं, ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:

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रात्रि के समय शिवलिंग पर दीया जलाने से न केवल महादेव की कृपा मिलती है बल्कि कुबेर भी प्रसन्‍न होते हैं। मंदिर में प्रवेश करते समय गायत्री मंत्र का जाप करें और मंदिर से बाहर निकलते समय तक निरंतर इस मंत्र का जाप करते रहें। इस उपाय से भगवान शंकर और कुबेर की कृपा बरसती है जिससे जीवन के सारे कष्‍टों का निवारण होता है और 
सभी प्रकार के विकार खत्‍म होते हैं।

Wednesday, 27 July 2016

Mahashivratri Rudra Abhishek Puja - A Rescue to all Problems


Shravan month is the fifth month according to the Hindu calendar. The month begins from the day after Guru Purnima and continues till next Purnima. In the year 2016, this time period will begin from 20th of July and will end on 18th of August. It is considered as the holiest month dedicated to Lord Shiva.
Mondays are very auspicious as Monday is dedicated to Lord Shiva. So, all Mondays in the month of Shravana are known as Shravana somvaes which are important days to offer prayers.

It is said that during samudra manthan, Lord Shiva gulped poison which came out as a byproduct from samudra. Lord Shiva wore crescent moon to calm down the deadly poison. Further, river Ganga was offered. The season was Shravan and this is how the time became significant to worship Lord Shiva, the savior of human kind. Therefore, devotees offer prayers, flowers and organize Pooja to seek happy, long and prosperous life.

First Monday Of Shravana

Pooja known as Rudraabhishek Pooja is organized. Lord Shiva is worshipped in his Raudra avtar. Rudraabhishek is among the greatest Pooja which helps in fulfilling all desires. It is advantageous in the following ways –

Tuesday, 26 July 2016

मन की बात है मनवानी तो इससे करें शिव अभिषेक


सावन माह शुरु हो चुका है और इसके पहले सोमवार अथवा सोमवार के दिन भगवान शिव का व्रत रखने का विशेष महत्‍व है। कहते हैं कि जो कन्‍या सच्‍चे मन से सावन के सोमवार के व्रत रखती है उसे मां पार्वती की तरह मनचाहा वर और उत्‍तम वर की प्राप्‍ति होती है। आज हम आपको बता रहे हैं कि सावन के सोमवार में व्रत एवं पूजन में किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए -:

राम श्लाका

- मंदिर में पूजा के लिए जाते समय पूजन सामग्री को ढक कर ले जाएं।

- सावन के प्रथम सोमवार और सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर काले तिल डालकर पानी से स्‍नान करें और श्‍वेत रंग के वस्‍त्र धारण करें।


- पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व या उत्‍तर दिशा मे रखें।


- यदि आपकी कोई विशेष मनोकामना है तो भगवान शिव का अभिषेक दूध, दही, शहद, घी, सरसों का तेल और काले तिल से करें।

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- अभिषेक के दौरान मंत्रों का जाप अवश्‍य करें। मंत्रों में गायत्री मंत्र सर्वोपरि है।

The Holy Month - Sawan


Sawan or Shravan is considered as the holiest month dedicated to Lord Shiva.In the year 2016, this time period will begin from 20th of July and will end on 18th of August.

In this month, all Mondays are dedicated to Lord Shiva. All Tuesdays are dedicated to Goddess Parvati. Keeping fasts on Tuesdays in known as Mangal Gauri Fast.

Beliefs -

It is said that unmarried women who keep fasts on 16 Mondays are able to get a suitable husband for themselves and married ones for safety and protection of their households.
There are several devotees who step on to Kavad Yatra that is pilgrimage in order to bring holy water from Haridwar and then offering to Lord Shiva.

First Monday Of Shravana 

Legend -

Your fast will be incomplete without listening the story behind this fast. It is said that during samudra manthan, Lord Shiva gulped poison which came out as a byproduct from samudra. The season was Shravan and this is how the time became significant to worship Lord Shiva, the savior of human kind.
Let’s have a look on the zodiac signs and their certain method to worship Lord Shiva in this month –

Aries – The ruler of Aries sign is Mars who is worshipped in the form of Shivlinga only. Aries natives should offer curd and milk to the shivlinga. Offer dhatura and ghee lamp in front of the idol after worshipping.

Tuesday, 7 June 2016

सोमवार का व्रत, शिव की भक्‍ति का प्रतीक है....


हिंदू धर्म के अनुसार सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन भगवान शिव को प्रसन्‍न करने के लिए व्रत रखने का विधान है। मान्‍यता है कि सोमवार के दिन व्रत रखने से भगवान शिव मनवांछित फल का वरदान देते हैं। कुंवारी कन्‍याओं द्वारा मनवांछित वी पाने हेतु सोलह सोमवार व्रत रखने की भी रीति है। सोमवार के व्रत में कथा सुनने से भी व्रत का फल अच्‍छा मिलता है।

माता पार्वती और भगवान शिव की इस बातचीत को साहूकार सुन रहा था। उसे न तो इस बात की खुशी थी और ना ही गम। वह पहले की भांति शिवजी की पूजा करता रहा। कुछ समय उपरांत साहूकार के घर एक पुत्र का जन्म हुआ। जब वह बालक ग्यारह वर्ष का हुआ तो उसे पढ़ने के लिए काशी भेज दिया गया।

दोनों मामा-भांजे इसी तरह यज्ञ कराते और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देते काशी की ओर चल पड़े। राते में एक नगर पड़ा जहां नगर के राजा की कन्या का विवाह था। लेकिन जिस राजकुमार से उसका विवाह होने वाला था वह एक आंख से काना था। 
आगे पढ़िए 

Thursday, 26 May 2016

मिलेगा शुभ फल, यदि रोज़ इस समय करेंगे भगवान शिव का व्रत....


देवों के देव महादेव की कृपा पाने के लिए श्रद्धालु कठिन से कठिन तपस्‍या करते हैं। कहते हैं कि यदि महादेव अपने भक्‍तों से प्रसन्‍न हो जाएं तो वह उनकी झोली खुशियों से भर देते हैं। भोले भंडारी की पूजा पूरे संसार में की जाती है। हिंदू धर्म के एकमात्र शिवजी ही ऐसे भगवान हैं जिनके सैंकड़ों भक्‍त विदेशी भी हैं। आपको शिव के पूजनीय स्‍थान पर सैंकड़ों की संख्‍या में बम बम भोले के नारे लगाते हुए विदेशी श्रद्धालु दिख जाएंगें। 
प्रदोष काल में किए जाने वाले नियम, व्रत एवं अनुष्ठान को प्रदोष व्रत कहा गया है। ऐसी मान्‍यता है कि इस समय व्रत करने से भगवान शिव जल्‍दी प्रसन्‍न होते हैं।
सप्ताह के सातों दिन के प्रदोष व्रत का विशेष महत्त्व है। इसके निम्‍न लाभ हैं -:
रविवार के प्रदोष व्रत से निरोगी काया का आशीर्वाद प्राप्‍त होता है।
– सोमवार के दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
– मंगलवार को प्रदोष व्रत रखने से असाध्‍य रोग भी ठीक होते हैं।