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Wednesday, 12 April 2017

इस तरह कुंडली में बनते हैं प्रेम विवाह के योग


आधुनिक जीवनशैली के साथ-साथ लोगों की सोच भी आधुनिक हो गई है लेकिन एक चीज़ है जो आज भी नहीं बदली है और वो है विवाह की रस्‍म। अब लोग प्रेम विवाह को ज्‍यादा महत्‍व देने लगे हैं। लेकिन ऐसा कतई भी जरूरी नहीं है कि आप प्रेम संबंध में हैं तो आपका प्रेम विवाह भी निश्चिही होगा।

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शास्‍त्रों में क्‍या है प्रेम विवाह का महत्‍व

हिंदू धर्म में 8 प्रकार के विवाह का विधान है जिसमें ब्रह्मा विवाह को सर्वश्रेष्‍ठ माना जाता है और पैशाच विवाह को सबसे नीचे की श्रेणी में रखा गया है। शास्‍त्रों के अनुसार गंधर्व विवाह को ही प्रेम विवाह कहा गया है। गंधर्व विवाह के अंतर्गत स्‍त्री और पुरुष अपनी मर्जी और अपनी पसंद से एक दूसरे से विवाह करते हैं।

किसका होता है प्रेम विवाह

ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार किसी व्‍यक्‍ति का प्रेम विवाह होगा या नहीं ये उसकी कुंडली से ज्ञात किया जा सकता है। कुंडली में विराजमान ग्रहों की स्थिति से यह पता लगाया जा सकता है कि उस व्‍यक्‍ति के जीवन में प्रेम विवाह का योग है या नहीं। तो आइए जानते हैं कि किस तरह कुंडली से प्रेम विवाह के योग के बारे में पता लगाया जा सकता है।

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- ज्‍योतिष शास्‍त्र के अनुसार कुंडली का सप्‍तम भाव विवाह का भाव होता है। यदि सप्‍तम भाव का संबंध कुंडली के तीसरे, पांचवे, नौंवे या बारहवें भाव से हो तो उस जातक का प्रेम विवाह होता है।

- लग्‍न स्‍थान के स्‍वामी और सप्‍तम भाव के स्‍वामी के बीच युति हो तो ऐसी स्थिति में जातक के प्रेम विवाह के योग बनते हैं।

- सौरमंडल के ग्रह गुरु और शुक्र विवाह के कारक ग्रह माने जाते हैं। लड़कियों की कुंडली में गुरु का पाप प्रभाव में होना और लड़के की कुंडली में शुक्र का पाप प्रभाव में होना प्रेम विवाह के योग का निर्माण करता है।

- इसके अलावा यदि लग्‍न भाव का स्‍वामी, पंचमेश के साथ युति कर रहा हो या दोनों का आपस में दृष्‍ट संबंध हो या राशि परिवर्तन हो तो उस जातक के प्रेम विवाह की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

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- सप्‍तम या पंचम भाव या इन भावों के स्‍वामी पर राहु का प्रभाव हो या इन भावों का स्‍वामी तीसरे, पांचवें, सातवें, ग्‍यारहवें या बारहवें भाव में बैठा हो तो उस व्‍यक्‍ति का निश्चित ही प्रेम विवाह होता है।

- यदि कुंडली के नवम स्‍थान में धनु या मीन राशि हो या शनि या राहु की दृष्टि सप्‍तम, नवम या गुरु पर पड़ रही हो तो ऐसी स्थिति में उस जातक के प्रेम विवाह के योग बनते हैं।

Thursday, 6 April 2017

कुंडली में बन रहा ग्रहण योग कर सकता है आपको बर्बाद, जानें समाधान.......


शुभ और अशुभ योग

ज्‍योतिषशास्‍त्र में कई ऐसे शुभ और अशुभ योगों का वर्णन किया गया है जो अगर किसी व्‍यक्‍ति की कुंडली में बनते हैं तो उस व्‍यक्‍ति के जीवन और उसके भाग्‍य पर इसका विशेष प्रभाव पड़ता है। ये शुभ और अशुभ योग या तो उस व्‍यक्‍ति के जीवन को खुशहाली से भर देते हैं या फिर उसे तबाह और बबार्द कर देते हैं।

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ग्रहण योग

अशुभ योगों में कालसर्प दोष, शकट योग, गजकेसरी योग, विषकन्‍या योग आदि आते हैं। ये योग किसी भी व्‍यक्‍ति के जीवन को कष्‍टों से भर देते हैं। इन्‍हीं अशुभ योगों की तरह ग्रहण योगभी होता है जो व्‍यक्‍ति के जीवन पर गहरा असर डालता है। आज हम जीवन पर ग्रहण योग के पड़ने वाले असर के बारे में जानेंगें।

कब बनता है ग्रहण योग

यदि कुंडली में चंद्रमा या सूर्य, राहू और केतु के प्रभावांतर्गत आते हैं यानि राहू-केतु का सूर्य-चंद्रमा से दृष्टि या युति संबंध हो तो उस जातक की कुंडली में ग्रहण योग बनता है। ये योग उस व्‍यक्‍ति को केवल कष्‍ट ही पहुंचाता है।

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कब नहीं देता अशुभ फल

पूर्ण रूपेण ग्रहण योग के निर्माण के लिए इन ग्रहों का स्‍वयं अशुभ स्‍थानों का स्‍वामी होना या फिर इनका अशुभ ग्रहों से कमज़ोर होना आवश्‍यक है। अगर किसी की कुंडली में शुभ भाव में चंद्र-सूर्य स्‍वामी बनकर बैठे हों या राहू-‍केतु का उनके साथ संयोग बन रहा हो तो ऐसी स्थिति में ग्रहण योग से अशुभ फल के स्‍थान पर शुभ फल प्राप्‍त होते हैं।

ग्रहण योग के प्रभाव

अगर कुंडली में ग्रहण योग बन रहा है तो ऐसी स्थिति में जातक को शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। उसे अपमान, अपनों से अनबन, रोग, कर्ज, कलंक और राजदंड का सामना करना पड़ता है। कुंडली में जिन-जिन भावों पर राहू-केतु की नज़र पड़ रही हो, वह भाव पीडित होकर अपने से संबंधित बुरे फल प्रदान करते हैं।

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अगर किसी की कुंडली में ग्रहण योग की वजह से अशुभ फल मिल रहे हैं तो ऐसी स्थिति में चंद्रमा और सूर्य को मज़बूत करने और राहू-केतु को शांत करने के लिए उपाय करें। राहू-केतु को शांत करने के लिए भगवान शिव और हनुमान जी की उपासना करें और चंद्रमा को प्रसन्‍न करने के लिए श्‍वेद वस्‍तुओं का प्रयोग और दान करें और सूर्य को प्रबल करने के लिए सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करें। 

Monday, 27 March 2017

अपनी राशि के अनुसार जानें कौन-सा रिश्ता आपके लिए है सबसे खास


ज्‍योतिष शास्‍त्र के अनुसार कुछ ऐसी राशियां होती हैं जिनका अपने किसी रिश्‍ते को बिगाड़ना खुद आपको भारी पड़ सकता है। आपके जीवन में आपके सबसे करीब रहने वाले लोग या खुद आपके दोस्‍त ही आपके लिए घातक बन सकते हैं। जी हां, शास्‍त्रों में कुछ ऐसे रिश्‍तों के बारे में बताया गया है जिनसे झगड़ा करने से खुद आपका ही नुकसान होता है। आइए जानते हैं इन राशियों के बारे में -:

मेष

मेष राशि के लोगों को अपने दादा-दादी और नाना-नानी से बेहद लगाव होता है। इनका स्‍वास्‍थ्‍य आपकी चिंता का विषय रहता है। ज्‍योतिषशास्‍त्र के अनुसार अपने स्‍वयं के उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी आपको अपने ये रिश्‍ते अच्‍छे बनाए रखने की जरूरत है। भगवान शिव का पूजन करने से आपको अपने ये रिश्‍ते सुधारने में मदद मिलेगी।

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वृषभ

वृषभ राशि के जातक अपने भाई-बहन से ज्‍यादा करीब होते हैं। वृषभ राशि के जातकों का अपने भाई-बहन के साथ रिश्‍ता बिगाड़ना इनके करियर के लिए भारी पड़ सकता है। अपने भाई-बहन के साथ मधुर संबंध बनाए रखने के लिए सूर्य को जल चढ़ाएं। रविवार को ये उपाय जरूर करें।

मिथुन

मिथुन राशि के जातकों के संबंध अपने पड़ोसियों से सबसे अच्‍छे होते हैं। अगर आपके संबंध इनके साथ बिगड़ जाएं तो आपकी पर्सनल लाइफ इस वजह से खराब हो सकती है। इसलिए अपने पड़ोसियों को ज़रा संभाल कर रखें। आपको भगवान कृष्‍ण की आराधना करनी चाहिए।


कर्क

कर्क राशि के लोगों को अपने माता-पिता से कभी झगड़ा नहीं करना चाहिए। आपके लिए आपके माता-पिता से बढ़कर कुछ भी नहीं है। इनसे दूरी या रिश्‍ते में खराबी आपको मानसिक और भावनात्‍मक परेशानी दे सकती हैं। आपको भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए।

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सिंह

सिंह राशि के जातकों को अपने जीवनसाथी के साथ मधुर संबंध बनाए रखने चाहिए। जीवनसाथी के साथ रिश्‍ते बिगड़ना मतलब आपको अवसाद में डुबा सकता है। पार्टनर के साथ मतभेद के कारण आपको सेहत संबंधी परेशानियां भी झेलनी पड़ सकती हैं। आपको हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए।

कन्‍या

कन्‍या राशि के जातकों के जीवन में दोस्‍तों का बहुत महत्‍व होता है। कन्‍या राशि के जातकों के जीवन में दोस्‍त इनके महत्‍वपूर्ण निर्णय लेने में मदद करते हैं। दोस्‍तों से मतभेद करना आपकी आर्थिक परेशानी का कारण बन सकता है। इनसे बेहतर रिश्‍ते बनाए रखने के लिए भगवान विष्‍णु की उपासना करें।

Thursday, 9 March 2017

इस वजह से अब तक अधूरी है जगन्नाथजी की मूर्ति.....


चार धामों में से एक

चार धामों में से एक जगन्‍नाथ पुरी भगवान कृष्‍ण को समर्पित है। इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। किवदंती है कि एक बार यशोदा, देवकी जी-श्रीकृष्‍ण, सुभद्रा और बलराम के साथ वृंदावन आए हुए थे। रानियों ने यशोदा जी से निवेदन किया कि वे श्रीकृष्‍ण की बाल लीलाओं का वर्णन करें।

सुभद्रा ने दिया दरवाज़े पर पहरा

उनकी बातें कोई न सुने इसलिए सुभद्रा को दरवाज़े पर पहरा देने के लिए कहा। श्रीकृष्‍ण और बलराम को यहां आने की मनाही थी।

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बाल लीलाओं का वर्णन

यशोदा जी ने श्रीकृष्‍ण की बाल लीलाओं का वर्णन आरंभ किया। उनकी बातों में वहां बैठे सभी लोग मग्‍न हो गए। दरवाज़े पर पहरा दे रही सुभद्रा भी बाल लीलाओं को सुनने में मग्‍न हो गई और इतने में ही वहां श्रीकृष्‍ण और बलराम द्वार पर आकर उन सबकी बातें सुनने लगे।

सुभद्रा की मूर्ति का कद

अधिक प्रेमभाव के कारण स्‍वयं सुभद्रा का शरीर पिघलने लगा। इसी वजह से जगन्‍नाथ मंदिर में सुभद्रा की मूर्ति का कद सबसे छोटा है।

नारद मुनि आए

बाल लीला सुनाने के दौरान ही वहां अचानक से नारद मुनि आ पहुंचें और उनके आगमन से सभी लोग होश में आए।

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राजा इंद्रद्युम्‍न के स्‍वप्‍न

तब श्रीकृष्‍ण का रूप देखकर नारद मुनि बोले – प्रभु आप कितने सुंदर लग रहे हैं। इस रूप में आप कब अवतार लेंगें? तब श्रीकृष्‍ण ने कहा कि वे कलियुग में राजा इंद्रद्युम्‍न के स्‍वप्‍न में पधारे।

विग्रह का निर्माण

श्रीकृष्‍ण ने राजा से कहा- पुरी की दुनिया के किनारे एक पेड़ के तने में तुम मेरा विग्रह बनाओ और बाद में उसे मंदिर में स्‍थापित करो। राजा ने ठीक इसी प्रकार सब कुछ किया।

रहस्‍यमयी बूढ़ा ब्राह्मण

उस समय वहां एक रहस्‍यमयी बूढ़ा ब्राह्मण आया और उसने कहा कि वह प्रभु की विग्रह बनाएगा लेकिन विग्रह बनाते समय बंद कमरे में कोई उन्‍हें देखेगा हनीं वरना वो काम अधूरा छोड़कर चला जाएगा।

कमरे का द्वार

अब बूढ़े ब्राह्मण ने काम शुरु कर दिया। थोड़े दिनों बाद कमरे से आवाज़ आना बंद हो गई। राजा को चिंता हुई और उन्‍होंनें कमरे का द्वार खोल दिया।

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वास्तुकार विश्वकर्मा

द्वार के खुलते ही राजा ने कमरे के अंदर प्रभु के अधूर विग्रह के अलावा और किसी को नहीं पाया। तब उन्हें एहसास हुआ कि ब्राह्मण और कोई नहीं बल्कि देवों का वास्तुकार विश्वकर्मा था।

अधूरा विग्रह

तभी वहां नारद मुनि पधारे और उन्‍होंने राजा को कहा कि भगवान कृष्‍ण की यही इच्‍छा थी। वे खुद चाहते थे कि उनका विग्रह अधूरा रहे।

पेड़ के तने से बनी मूर्ति


यही कारण है कि जगन्‍नाथ पुरी के मंदिर में कोई पत्‍थर या अन्‍य किसी धातु की मूर्ति न होकर पेड़ के तने को इस्‍तेमाल करके बनाई गई मूर्ति की पूजा होती है।


Monday, 2 January 2017

कोर्ट केस जीतना है या किसी को आकर्षि‍त करना है तो करें ये सरल उपाय......


हत्‍था जोड़ी एक पौधे की चमत्‍कारिक जड़ है जो जीवन को समृद्ध बनाने की शक्‍ति रखती है। हत्‍था जोड़ी में तांत्रिक शक्‍तियां समाहित होती हैं जो रातोंरात किसी गरीब को अमीर बना सकती है। कहते हैं कि इस चमत्‍कारिक जड़ी पर स्‍वयं मां लक्ष्‍मी की कृपा होती है। पैसों से जुड़ी हर समस्‍या के लिए हत्‍था जोड़ी एक वरदान है।


हत्‍था जोड़ी अत्‍यंत कारगर जड़ी मानी जाती है लेकिन ये तभी काम करती है जब इसका विशेष तरीके से पूजन कर उपयोग में लाया जाए। हत्‍था जोड़ी के पूजन में सर्वप्रथम इसे पंचामृत में रखा जाता है और फिर इसे स्‍वच्‍छ जल से साफ किया जाता है।


इसके पश्‍चात् हत्‍था जोड़ी का पंचोपचार पूजन कर इसे कपूर और लौंग के साथ 1-2 दिन के लिए रख दें। इसके बाद एक जार में तिल के तेल में हत्‍था जोड़ी डुबोकर रखें। तेल कम होने पर जार में तेल डालते रहें। जब तेल जब तेल कम होना बंद हो जाए तो शुभ समय में इसे निकालकर पूजन करें।


अब मां लक्ष्‍मी के चित्र के आगे तांबे के लोटे में जल भरकर रखें और सर्वप्रथम भगवान गणेश और गुरु की पूजा करें। इसके बाद हत्‍था जोड़ी का इत्र, चावल, लाल फूल से पूजन करें और केसर की एक जोड़ी लौंग के साथ अर्पित करें। अब हत्‍था जोड़ी को धूप-दीप और नैवेद्य दें।लाल रंग की मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद हत्था जोड़ी को सिंदूर लगाकर उसके सामने 108 बार ऐं किलि किलि स्वाहा ये मंत्र बोले और एक लाल कपड़े में बांधकर हत्था जोड़ी को अपने साथ रखें।

सिद्ध की हुई हत्था जोड़ी को चांदी या स्टील की डिब्बी में लौंग, इलायची और सिंदूर के साथ डिब्बी को बांध कर रख दें। रोज़ पूजन के समय उस डिब्बी को खोलकर धूप-दीप दें

Monday, 12 December 2016

आपके घर की बरकत बढ़ा सकता है 1 रुपए का सिक्का...

अगर आपके घर में पैसों को लेकर बरकत नहीं है तो ज़ाहिर सी बात है कि आपको कष्‍टों का सामना करना पड़ता होगा।  अगर आप भी इस तरह की समस्‍या से गुज़र रहें हैं तो आपकी समस्‍या का समाधान है ये उपाय। इस उपाय को करने से आपके घर में बरकत बनी रहेगी और आपके सारे दुख दूर होंगें।
- यदि रास्‍ते में जाते समय कोई किन्‍नर नज़र आ जाए तो उसे अपनी सामर्थ्‍यानुसार दक्षिणा दें। किन्‍नर से एक रुपए का सिक्‍का मांग लें और इस सिक्‍के को अपने गल्‍ले या तिजोरी में रखें। कुछ ही दिनों में आप महसूस करेंगें कि आपकी सेविंग बढ़ती जा रही है।

जानें दिसंबर माह का राशिफल

-  यदि घर में अशांति का माहौल रहता है तो सूर्योदय के समय जिस लोटे या मटके से घर के सभी सदस्‍य जल पीते हैं उस जल को अपने घर के हर कोने में छिड़कें। इस उपाय को करते समय किसी से भी बात न करें। मन ही मन ऊँ शांति ऊँ मंत्र बोलते रहें।

मात्र ये एक उपाय दे सकता है आपको पैसा और प्‍यार

- अगर आपके घर में कोई लंबे समय से बीमार है तो किसी भी सोमवार के दिन शिव मंदिर जाकर तांबे के अलावा किसी अन्‍य धातु के बर्तन से दूध में काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक करते समय ऊँ जूं स: मंत्र का जाप करते रहें।

Wednesday, 23 November 2016

इन चीजों को खोने से आता है दुर्भाग्य.....


शास्‍त्रों में व्‍यक्‍ति के सुखी जीवन हेतु कुछ नियम बनाए गए हैं जिनका पालन करने से उसे न केवल सुख की प्राप्‍ति होती है बल्कि उसके जीवन की सारी बाधाएं भी दूर हो जाती हैं। इसी तरह शास्‍त्रों में कुछ चीज़ों को लेकर भी नियम बनाए गए हैं। इन चीजों को खोने से अपशकुन होता है और दुर्भाग्‍य आता है। तो आइए जानते हैं किन चीजों को खोने से आता है दुर्भाग्‍य -:

जानें दिसंबर माह का राशिफल


- स्‍वर्ण को पवित्र और पूज्‍य कहा गया है। किसी शुभ मुहूर्त में सोना रीदने से घर में लक्ष्‍मी जी का वास होता है। शास्‍त्रों के अनुसार सोना मिलना अथवा गुम होना दोनों ही अपशकुन माने जाते हैं। स्‍वर्ण गुरु ग्रह से संबंधित है इसलिए माना जाता है कि सोने के खोने से गुरु के नकारात्‍मक प्रभाव मिलने शुरू हो जाते हैं।

केपी पद्धति के अनुसार कब होगा विवाह ?


-  यदि कान की बाली अथवा ईयर रिंग गुम हो जाए तो यह किसी अशुभ समाचार का संकेत माना जाता है।

- नथनी अथवा नाक की लोंग खोने पर बदनामी एवं अपमान झेलना पड़ता है।

क्‍या है टाटा ग्रुप का भविष्‍य : ज्‍योतिषीय विश्‍लेषण


- यदि किसी का मांग टीका खो जाए तो किसी बड़ी मुसीबत के कारण तनाव हो सकता है।

- गले का हार खो जाए तो सुख-समृद्धि में कमी आती है।

- बाजू बंद के खोने से आर्थिक तंगी तो वहीं कंगन के गुम हो जाने से मान-सम्‍मान की हानि होती है।

- अंगूठी खोने से कोई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या घेर सकती है।

Tuesday, 20 September 2016

मनी प्लांट से जुड़ी ये बाते जरूर रखें ध्यान वरना फायदे की जगह हो सकता है नुकसान

वास्‍तुशास्‍त्र के नियमों का हमारे जीवन पर अत्‍यंत प्रभाव पड़ता है। यदि घर या दुकान में कोई वास्‍तु दोष हो तो उस स्‍थान पर रहने वाले लोगों को कई तरह के कष्‍टों का सामना करना पड़ता है। इसी तरह वास्‍तु में कई पौधों को लगाने का उल्‍लेख भी किया गया है। वास्‍तु के अनुसार इन पौधों को वास्‍तु के अनुरूप लगाने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। मनी प्‍लांट के बारे में तो आपने सुना ही होगा। वास्‍तुशास्‍त्र में हर पौधे के लिए एक शुभ दिशा निर्धारित की गई है। पौधे को सही दिशा में लगाने से उसका शुभ फल प्राप्‍त होता है तो वहीं गलत दिशा के कारण नुकसान झेलना पड़ता है। मनी प्‍लांट भी कुछ ऐसी ही विशेषता रखता है। इसे वास्‍तुशास्‍त्र में बताई गई दिशा के अनुरूप न रखने से ये पैसों का नुकसान भी करवा सकता है। तो आइए जानते हैं मनी प्‍लांट से जुड़ी कुछ महत्‍वपूर्ण बातें -:

मंगल दोष से परेशान हैं तो करें ये उपाय



- मनी प्‍लांट को कभी भी ईशान कोण यानि उत्‍तर-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए। इससे धन हानि, सेहत में गिरावट और संबंधों में खटास आती है।
- मनी प्‍लांट की बेलें कभी भी जमीन को नहीं छूनी चाहिए। इससे घर में रह रहे लोगों को कई तरह के नुकसान से गुज़रना पड़ता है।
- मनी प्‍लांट को घर के अंदर लगाना ज्‍यादा शुभ माना जाता है। इसे गमले या किसी बोतल में लगाया जा सकता है।
- मनी प्‍लांट में कभी भी मुरझाए हुए पत्‍ते न रहने दें। पत्‍तों का मुरझाना अशुभ माना जाता है। रोज़ मनी प्‍लांट को पानी दें।

कुंडली में शुक्र और शनि का मेल दिलाता है धन-वैभव


- पूर्व-पश्चिम दिशा में मनी प्‍लांट लगाने से पति-पत्‍नी के रिश्‍ते में खटास आ सकती है। इस दिशा से संबंधों के बीच तनाव उत्‍पन्‍न होता है।
- मनी प्‍लांट के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा यानि आग्‍नेय कोण उत्‍तम माना जाता है। इस दिशा में गणेश जी का वास होता है। यहां पर मनी प्‍लांट लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

Friday, 2 September 2016

Know how will be your Married Life

Everyone want their life partner to be loving, responsible and ideal. Whether you are getting a desired life partner, he will be loving or not, how will your married life be, astrology has the answers to these questions. 

Let’s have a look on the following conditions –

– Saturn’s bad sight or aspect with Mars in the 7th house gives a lot of problems in the married life.

Rahu placed in the 7th house will make husband indulging himself into alcohol, gambling and other characterless activities.

Sun, Mercury or Venus in the 7th house of the birth chart gives lazy and selfish life partner.

– If the Lord of the 7th house is present in the 8th house then the person will face delays and problems in marriage.


Tuesday, 30 August 2016

पैसों की है तंगी या प्रमोशन का है इंतज़ार... करें बस ये एक काम


आधुनिक जीवनशैली में जहां एक ओर सुविधाएं बढ़ी हैं तो वहीं परेशानियों में भी काफी बढ़ोत्‍तरी हो गई है। किसी को धन की कमी है तो किसी को नौकरी में प्रमोशन का इंतज़ार है। कोई पारिवारिक कलह से परेशान है तो कोई लव लाइफ में खुशियां पाना चाहता है। आज हम आपको ऐसे ही कुछ सामान्‍य समस्‍याओं के उपायों के बारे में बताते हैं -:


पैसों की तंगी दूर करने के लिए

बुधवार के दिन किसी भी समय जब कोई किन्नर नज़र आए तो उसे अपने सामर्थ्‍य के अनुसार कुछ रुपए आदि भेंट करें। संभव हो तो उसे भोजन भी कराएं। इसके बाद उस किन्नर से आप एक सिक्का मांग लें। इस सिक्के को अपने गल्ले, कैश बॉक्स या धन स्थान पर रख दें। कुछ ही दिनों में आप स्‍वयं महसूस करेंगें कि आपकी समस्या का समाधान हो रहा है।


प्रमोशन पानी है तो

बुधवार की सुबह श्रीगणेश की पीले रंग की मूर्ति की पूजा करें। पूजन में श्रीगणेश को हल्दी की पांच गठान श्री गणाधिपतये नम: मंत्र का उच्चारण करते हुए चढ़ाएं। इसके बाद 108 दूर्वा पर गीली हल्दी लगाकर श्री गजवकत्रम नमो नम: का जाप करके चढ़ाएं। यह उपाय हर बुधवार को करने से आपकी नौकरी में पदोन्‍नति होने की प्रबल संभावना है।


वैवाहिक जीवन में कलह

जब आपके पति गहरी नींद में सोए हों, तब एक नारियल, सात गोमती चक्र और थोड़ा-सा गुड़ लेकर इन सभी सामग्री को एक पीले कपड़े में बांध लें। अब इस पोटली को अपने पति के ऊपर से सात बार उतार कर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इसके अलावा प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य दें और अपनी मनोकामना की पूर्ति की प्रार्थना करें।

Wednesday, 17 August 2016

लाल किताब के उपायों को करने के क्या हैं नियम ?

लाल किताब में मनुष्‍य की हर प्रकार की समस्‍या का निदान दिया गया है किंतु इन्‍हें कैसे किया जाना है यह बात भी महत्‍वपूर्ण है। किसी भी उपाय का पूर्ण फल पाने हेतु आवश्‍यक है कि उसे पूरी श्रद्धा से किया जाए। पूरे मन से किया गया उपाय कभी निष्‍फल नहीं होता अर्थात्‍ वह आपके लिए कल्‍याणकारी सिद्ध होता है।

- कोई भी उपाय केवल दिन के समय करें अर्थात्‍ सूर्य के निकलने और छिपने के दौरान ही करें। रात्रि के समय किए गए उपाय अशुभ फल दे सकते हैं।

- एक दिन में केवल एक ही उपाय करना शुभ फलदायी माना जाता है। यदि एक दिन में एक से ज्‍यादा उपाय किए जाएं तो ऐसी स्थिति में वह उपाय निष्‍फल रहते हैं।

- उपाय से संबंधित परहेज़ अथवा सावधानी का सख्‍ती से पालन करें।

- उपाय जितने समय तक करने के लिए कहा गया हो उसे उतने समय के अंतरराल में ही करें। इसके बाद इसे बंद कर दें।

- यदि किसी कारणवश कोई उपाय बीच में ही बंद करना पड़ जाए या किसी दिन छूट जाए तो उपाय करने से एक दिन पूर्व थोड़े से चावल लें और उसे दूध से धोकर सफेद रंग के कपड़े में बांध लें। पुन: उपाय की शुरुआत करते समय वह चावल किसी धार्मिक स्‍थल अथवा बगीचे में डाल दें। ऐसा करने से वह उपाय अधूरा नहीं माना जाएगा और उसका पूरा फल प्राप्‍त होगा।


- घर में किसी बच्‍चे के जन्‍म लेने या किसी की मृत्‍यु हो जाए तो उपाय बंद कर दें।

Tuesday, 16 August 2016

भाई की मंगल की कामना करनी है तो राखी पर ऐसे सजाएं थाली

18 अगस्‍त को रक्षाबंधन का पवित्र त्‍योहार है। भाई-बहन के इस पवित्र त्‍योहार को हिंदू धर्म में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं लेकिन इससे पहले वह विशेष थाली सजाती हैं। इस थाली में इन चीज़ों का होना शुभ और अनिवार्य माना जाता है।

नहीं है भद्रा का साया इस राखी पर…

कुमकुम -: प्रत्‍येक शुभ कार्य को तिलक लगाने के बाद ही शुरु किया जाता है। वहीं तिलक मान-सम्‍मान का भी प्रतीक है। बहन अपने भाई को मिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती है।

चावल -: तिलक के पश्‍चात् चावल लगाने की भी रीति है। यह शुभता का प्रतीक है। इसके अलावा चावल शुक्र ग्रह से भी संबंधित है जो कि जीवन में सुख-सुविधा प्रदान करता है।

सावन के आखिरी सोमवार में इन उपायों से करें भोले भंडारी को प्रसन्‍न

नारियल -: तिलक लगाने के बाद भाई के हाथ में नारियल देने की परंपरा है। नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है अर्थात् यह श्री यानि देवी लक्ष्‍मी का फल है। देवी लक्ष्‍मी धन की देवी हैं। बहन अपने भाई के हाथ में नारियल देते हुए यह कामना करती है कि उसके भाई के घर में कभी धन की कमी न हो।

रक्षा सूत्र -: मान्‍यता है कि रक्षा सूत्र बांधने से त्रिदोष यानि वात, पित्‍त और कफ शांत होते हैं।